संकल्प और इच्छाशक्ति से सफलता पाने वाले अनिल अहिरकर
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10 अक्टूबर जन्मदिन विशेष...
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश उपाध्यक्ष तथा पूर्व नागपुर शहर जिलाध्यक्ष एवं अहिरकर ग्रुप के संचालक अनिल अहिरकर का बहुत सफलतम हस्तियों में से एक नाम है। इन्होंने बहुत ही विपरीत परिस्थिति में संघर्ष करते हुए यह मुकाम हासिल किया है।
१९७५ में कालेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद इनके परिवार वालों ने भी उम्मीद की थी कि कहीं अच्छी सी नौकरी कर ले। मीडिल क्लास परिवार में बच्चों से यही अपेक्षा की जाती है कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वे कहीं नौकरी कर लें. और उस समय आसानी से नौकरी मिल भी जाती थी, लेकिन धारा से विपरीत हटकर इन्होंने गांजाखेत चौक में एक छोटी सी चाय की दूकान शुरू कर ली.
पिताजी का सब्जी का व्यवसाय था, सो थोड़ी बहुत कारोबारी समझ थी। वे बताते है कि पढ़ाई के दिनों से वे छात्र राजनीति से जुड़े हुए थे. इससे चौक में अक्सर स्टूडेंट्स के बड़े ग्रुप के साथ उनकी बैठके रहती थी। वहीं एक होटल वाले ने चाय की दुकान के लिए जगह दे दी, चाय का व्यवसाय चल निकला। अपनी दुकान का सामान रखने के लिए वहीं इन्होंने एक ६ बाय ६ का कमरा किराए से ले लिया. इसके बाद विचार आया कि क्यों न यहीं से चायपत्ती का व्यवसाय शुरू कर लिया जाए।
तब कई लोगों ने इनसे कहा कि यह बिजनेस नहीं चल पाएगा। तब इन्होंने उनका यह चैलेंज स्वीकार कर मेहनत करना शुरू किया। मेहनत रंग लाई और यहीं से अनिलकुमार टी कंपनी की शुरुआत हुई, व्यवसाय चल निकला। देश के अलग - अलग राज्यों की चाय की अलग खासियत होती है. इन चायपत्ती को ब्लेंड कर ग्राहकों की पसंद और बजट के अनुसार कई विकल्प पेश किए गए जिसे लोगों ने हाथों हाथ लिया। अनिलकुमार टी कंपनी के नाम से शहर में ५० से अधिक काउंटर हैं। आज अनिलकुमार टी कंपनी विदर्भ के सबसे बड़े चायपत्ती विक्रेता हैं।
११ वर्ष पूर्व कारोबार को विस्तार करते हुए मसाले के क्षेत्र में भी कदम रखा। विदर्भ में सावजी भोजन काफी पसंद किया जाता है। इसे देखते हुए सावजी मसाले लांच किए। मैजिक पेस्ट भी पेश किया जिससे किसी भी प्रकार की सब्जी तुरंत से बनाई जा सकती है। इंस्टेंट फूड की भी रेंज पेश की। इन कारोबार में भाई प्रशांत, बेटे स्वप्निल और बेटी जीविका का भी सहयोग मिला।
अनिल अहिरकर का मानना है कि कारोबार कर विस्तार सिर्फ पैसा कमाने के उद्देश्य से नहीं किया. पैसा कमाने के साथ समाज के प्रति दायित्वो को हमेशा ध्यान में रखा. हमारे जरिए अगर कुछ लोगों को रोजगार मिल रहा है तो इससे बड़ी संतुष्टि और क्या हो सकती है। आगे इन्होंने होटल व्यवसाय में कदम रखा। उन होटलों को एक्वायर करना शुरू किया जो किसी कारणवश चल नहीं पाए।
आज अहिरकर गुप के तहत ५ होटल संचालित किए जा रहे हैं, कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में भी इन्होंने प्रवेश किया है। इन्होंने कहा कि अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि सरकार हमारे लिए क्या कर रही है. हमारे माता - पिता ने हमारे लिए क्या किया. इस तरह की बातें करने वाले लोग निकम्मे होते हैं. भगवान ने अगर हमें एक पेट दिया है तो उसे भरने के लिए २ हाथ भी दिए. दुनिया में आज तक जितने लोग सफल हुए उनमें से ९९ प्रश ने पहले असफलता का सामना किया।
हर कामयाब इंसान को परिस्थिति से जूझना पड़ता है. लक्ष्य निर्धारित कर दृढ़ इच्छाशक्ति और ईमानदारी के साथ मेहनत की जाए तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। कुछ इसी तरह की सोच है शहर के टी किं कहे जाने वाले अनिल अहिरकर की है। इनका मानना है कि काम में क्रिएटिविटी होनी चाहिए. इसका आनंद संशोधन जैसा होता है। अपने काम से हम दूसरों को कितना ज्यादा से ज्यादा रोजगार दे सकें इसका प्रयास किया जाना चाहिए।