शशि दीप 'विश्व साहित्य रत्न अवार्ड 2021' से सम्मानित
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नागपुर/भोपाल। मुंबई की जानी-मानी विचारक, द्विभाषी लेखिका, पत्रकार, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित आध्यात्मिक नेटवर्किंग साइट, टाईम्स ऑफ़ इंडिया स्पीकिंग ट्री की चोटी की ब्लाॅगर, स्तंभकार, सामाजिक कार्यकर्ता, मानवता की प्रवर्तक और बेस्ट सेलिंग अंग्रेजी कृति Waves Within (Horizon and Beyond) की लेखिका श्रीमती शशि दीप को उनके साहित्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के फलस्वरूप पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्ध अखिल भारतीय पत्रकार संगठन प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स पंजीकृत द्वारा आजादी की 75वी वर्षगांठ अमृत महोत्सव के पावन अवसर पर गणतंत्र दिवस के मौके पर 'विश्व साहित्य रत्न अवार्ड 2021' से सम्मानित किया गया।
संगठन की राष्ट्रीय सचिव एवं मध्यप्रदेश प्रभारी श्रीमती पुष्पा चंदेरिया ने बताया कि केंद्रीय समिति कोर कमेटी की सहमति उपरांत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद खालिद कैस द्वारा यह सम्मान इस वर्ष साहित्यकार, लेखिका श्रीमती शशि दीप को दिया गया है।
गौरतलब है कि वे विभिन्न साहित्यिक संघों से जुड़ी हैं, और उन्होंने 400 से अधिक अंग्रेजी व हिन्दी आलेख, हिंदी/उर्दू और अंग्रेजी में 1500 उद्धरण और हिंदी और अंग्रेजी दोनों में करीब 200 कविताएं लिखी हैं।
उनकी कई हिन्दी एवं अंग्रेजी रचनाएँ, राष्ट्रीय स्तर के अखबारों, न्यूज़ लेटर्स तथा पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रही है। वे पत्रकारों की सुरक्षा के लिए वचनबद्ध अंतर्राष्ट्रीय पंजीकृत संस्था प्रेस क्लब प्रेस ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स भोपाल की राष्ट्रीय सचिव हैं। इसके साथ ही वे छत्तीसगढ़ की एक प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था “समन्वय साहित्य परिवार छत्तीसगढ़” से प्रकाशित समन्वय पत्रिका के संपादक मंडल की एक स्तंभ हैं और हाल ही में इसे वैश्विक रूप प्रदान करने के बाद, विश्व समन्वय साहित्य परिवार की मुख्य प्रभारी हैं।
वह एक जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो घरेलू सहायता कर्मियों, सफाई कर्मचारियों को, उनके श्रम की गरिमा व सम्मान दिलाने के प्रति समर्पित है। इसके साथ ही वे अनाथालय के बच्चों की शिक्षा और मानसिक/ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी काम कर रही है इसके साथ ही साथ पर्यावरण संरक्षण, वंचितों की शिक्षा, नारी सशक्तिकरण इत्यादि के लिए कार्यरत संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी भी निभाती रहीं हैं।
वे करीब 10 साल से पंजीकृत अंग दाता हैं, एवं मरणोपरांत अपने शरीर के सभी कार्यशील अंगों के दान के लिए वचनबद्ध है। इसे एक दिव्य दान बताते हुए, इसका पुरज़ोर समर्थन व प्रचार प्रसार करती रहीं हैं।
वे विविध सम्मान एवं पुरस्कार लब्ध हैं हालांकि वे इन सभी क्षेत्रों में सामर्थ्य के अनुसार अपने योगदान को ईश्वर की कृपा व निमित्त मात्र बताते हुए पल-पल कृतज्ञता से अभिभूत महसूस करती हैं।
वे भारत की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को बहुत महत्व देती है और इसलिए उन्होंने आज की पीढी के अंदर भारतीय संस्कारों को सुदृढ़ करने के लिए व उसके प्रचार-प्रसार करने के लिए संस्कार सुरूचि और सद्भावना नामक अभियान के अंतर्गत कक्षाएं शुरू कीं हैं। वे एक कट्टर देशभक्त हैं, व 'सादा जीवन उच्च विचार' को आत्मसात करने में विश्वास रखतीं हैं।