सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश के लिए राष्ट्रीय नीति जरूरी
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सभी वर्ग के लिए सख्त नियम हो
नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। शहरों की सडकों और नेशनल हाईवे पर बढ़ती दुर्घटनाओं के चलते अब यह बहुत जरुरी है, कि सभी उम्र के वर्ग की जान बचाने के लिए उचित और योग्य लाइसेंस धारकको राष्ट्रीय महामार्ग पर टू, थ्री, फोर व्हीलर लाइसेंस की अनुमति देवें। आजकल बिना किसी अनुभव के लाइसेंस दिया जाता है, जो वाहन चलाने के लायक नहीं है। अधिकांश धनी परिवार अपने युवाओं को शिक्षा के समय में कार देते है, जब वे इक्कीस वर्ष की आयु में भी पूर्ण नहीं हुए होते है।
युवा वर्ग है जो कि हाथ में व्हीकल्स दुपहिया, चार पहिया आने के बाद तेज स्पीड के साथ लापरवाही के साथ ड्राइविंग करते है। जब कि भारत सरकार ने विवाह की उम्र 21, वोट देने की और ड्राइविंग लाइसेंस की उम्र 18 की है। यद्यपि भारत सरकार के केंद्रीय परिवहन मंत्रालय ने अच्छी सड़कों का निर्माण किया। साथ ही नेशनल हाईवे पर तेज रफ्तार वाहन चलाने की इजाजत दे दी है। अगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अनुभवी ड्राइवर गाड़ी चलाते हैं ,तो कुछ लापरवाह बिना अनुभव के वाहनचालक भी वाहन चलाते हैं।
आजकल वाहनों की गति नब्बे सौ किलोमीटर प्रति घंटा के ऊपर है। ऐसे समय आसानी से ब्रेक नहीं लग पाते है।अब समय आ गया कि प्रत्येक दस किलोमीटर के बाद चेक पोस्ट स्थापित करनी होगी।जिससे चालक की तेज़ गति के ऊपर नियंत्रण हो सकता है। हाल ही में वर्धा के सड़क हादसे में 7 डॉक्टर विद्यार्थी की मौत का मामला प्रत्यक्ष उदाहरण है। आजकल सड़क और पुल पर आने - जाने के लिए बाएँ और दाएँ दो अलग-अलग रास्ते हैं।
लेकिन ज्यादातर स्थितियों में कुछ लापरवाही से ही दुर्घटनाएं हुईं। अब शहर, गॉव, राष्ट्रीय महामार्ग पर वाहन की गति पर नियंत्रण के साथ अतिरिक्त यातायात पुरुष, महिला सिपाहियों की नियुक्तियां राष्ट्रीय स्तर पर करना भी आवश्यक है। जिससे कि दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।