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स्त्री सृष्टि है और सृष्टि की साधना है : डॉ. नीरजा माधव


नागपुर/पुणे। स्त्री सृष्टि है और सृष्टि की साधना है, पर तथाकथित समाज में स्त्री को संपत्ति माना जाता है। इस आशय का प्रतिपादन आधुनिक पीढ़ी की महिला साहित्यकार डॉ. नीरजा माधव ने किया। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. तथा एच. आर. शाह महिला आर्ट्स व कॉमर्स महाविद्यालय, नवसारी, गुजरात के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदी साहित्य में स्त्री विमर्श’ विषय पर आयोजित आभासी राष्ट्रीय गोष्ठी में वे मुख्य वक्ता के रूप में अपना उद्बोधन दे रही थी। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने गोष्ठी की अध्यक्षता की। डॉ. नीरजा माधव ने आगे कहा कि, आधुनिकता और परंपरा के बीच आज की स्त्री फँसी हुई है। स्त्री के कितने चेहरे, दशाएँ व समस्याएँ हैं उन सभी को देखना असंभव है। स्त्री अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है। फिर भी स्त्री विमर्श को नए ढंग से देखने की आवश्यकता है। आधुनिक स्त्री धीरे-धीरे अपने अधिकारों को पा रही है। 

स्त्री वास्तव में सबसे बलवान है, वह क्रूर नहीं। वह उन्माद नहीं करती। उसके अर्थोपार्जन और सम्मानोपार्जन में एक कश्मकश जारी है। भारतीय नारी की दशा और दिशा पश्चिम की नारी से भिन्न है। जब - जब ज़रूरत पड़ी तब - तब भारतीय स्त्री अपनी अस्मिता के साथ आगे आयी। संविधान में तो स्त्री को बड़े अधिकार दिए हैं, पर समाज में उसे वे मिले नहीं। आज की स्त्री को संविधान वाली स्त्री बनना है। स्त्री लेखिका होने पर वह पुरुष विरोधी कदापि नहीं है। 

प्रो. डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा, अधिष्ठाता, कला संकाय व कुलानुशासक, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, म. प्र. ने बीज वक्तव्य में कहा कि भारतीय नारी अदृश्य विडंबनाओं का स्वीकार करती हुई चलती रही है। नारी देवी भी है। सर्वोच्च स्थान की अधिकारी और अपने घर के कोने की बंदी भी है। स्त्री के संदर्भ में समस्याएँ अभी भी बदली नहीं है। कामकाजी महिलाओं को दोहरा जीवन जीना पड़ता है। स्त्री विमर्श सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज़ मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय समापन में कहा कि प्रत्येक युग में स्त्री का आत्मसंघर्ष विद्यमान रहा है। सदियों से नारी की प्रताड़ना होती रही है और उसे मानसिक रूप से दबाकर उसका शोषण होता रहा है। हिंदी साहित्य में नारी की स्थिति और समस्याओं को तटस्थता व संतुलन के साथ सूक्ष्म अभिव्यक्ति मिली है। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, उ. प्र. के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी  ने संस्थान के उपक्रमों पर प्रकाश डाला। एच. आर. शाह महिला आर्ट्स  व कॉमर्स महाविद्यालय, नवसारी, गुजरात की प्रभारी प्राचार्या डॉ. नजमा बानू मलेक ने प्रास्ताविक भाषण में गोष्ठी के उद्देश्य को स्पष्ट किया। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज उ. प्र. की हिंदी सांसद व छत्तीसगढ़ प्रभारी डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर, छ. ग. ने गोष्ठी का सुचारू रूप से संचालन किया तथा महाविद्यालय की हिंदी प्राध्यापिका डॉ. स्मिता मिस्त्री ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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