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संजय बर्वे को विद्योत्तमा साहित्य सेवी सम्मान

                                                     


नागपुर/नाशिक। विद्योत्तमा फाउंडेशन, नाशिक द्वारा अखिल भारतीय सारस्वत सम्मान समारोह संपन्न हुआ. नागपुर के साहित्यकार संजय एस बर्वे को हिंदी साहित्य के क्षेत्र में किये गये अब तक के रचनात्मक एवं सृजनात्मक कार्य तथा भारतीय संस्कृती को अक्षुण्ण रखने में लेखनी द्वारा किये जा रहे प्रशंसनीय प्रयास के लिये विद्योत्तमा साहित्य सेवी सम्मान से अभिनंदन पत्र, पुस्तक आदी से सम्मानीत किया गया. 

संजय बर्वे ने हिंदी साहित्य की सुरुवात 1989 में दैनिक नवभारत में प्रकाशीत हुई कविता से हुई. उनकी रजनीगंधा और अंतर्मन काव्यसंग्रह प्रकाशीत है. वे हिंदी के प्रचार व प्रसार हेतू कार्यरत है. विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ, भागलपुर - महाराष्ट्र शाखा से उपाध्यक्ष व सलाहकार पदासीन रह चुके है. नागपुर में उन्होने विद्यापीठ का हिंदी अधिवेशन व सारस्वत सम्मान समारोह आयोजीत किया जिससे महाराष्ट्र शाखा को देश की समस्त शाखाओ में प्रथम क्रमांक प्राप्त हुआ. 

विदर्भ साहित्य संमेलन, साहित्य विहार, रसिक वाचक मंच, हिंदी कार्यान्वयन समिती आदी से हिंदी सेवा की. स्वातंत्रता के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में विक्रमशीला हिंदी विद्यापीठ की 18 राज्य की शाखाओ के पुनर्गठन में सहायता की. केंद्र सरकार द्वारा आयोजित हिंदी पखवाडा आयोजन, हिंदी कार्यशाला आदी में भी सहभागीता की. अब तक राष्ट्रीय स्तर पर कई कवि संमेलन में काव्य पाठ किया, विश्व शांती महासंमेलन, शिबीर, वार्षिक हिंदी अधिवेशन, जयंती समारोह, कवि संमेलन में हिंदी में सूत्र संचालन किया. 

संजय बर्वे महंत के रूप में कबीर वाणी पर प्रबोधन करते है. उन्होने कबीरजी की मूल पुरबी हिंदी वाणी की खोज कर इसे अपनी पुस्तको के माध्यम से पहली बार महाराष्ट्र के साहित्य क्षेत्र में प्रेषित किया. 1200 हिंदी कबीर वाणी की खोज करके मराठी में अनुवाद के लिये बुक ऑफ रेकॉर्ड्स में प्रविष्टी हुई है. संजय बर्वे ने हिंदी रचनाए सृजीत कर कोरोना काल में जनजागरण किया. संजय बर्वे ने विद्योत्तमा फॉउंडेशन के अध्यक्ष सुबोध कुमार मिश्र, महासचिव डॉ चंद्रिका प्रसाद मिश्र, उपाध्यक्ष भरत सिंह का आभार माना है.
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