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सूनी - सूनी सी है, ज़िन्दगी !


तु
जब से गयी है, 
उचट सा गया है 
मन 

बस 
जीएं
जा रहा  हूँ, 
एक
अजीब सा 
खालीपन लिए
इस 
भरी  दुनियाँ  में, 

माँ   ||

- डॉ. देवाशीष आचार्य 'देबू'
नागपुर (महाराष्ट्र)
काव्य 7818717886015645082
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