केंद्रीय बजट में सामान्य और मध्यम वर्ग को भी उचित सुविधाएं मिले
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नागपुर। केंद्रीय बजट पर 139 करोड़ देशवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं। गत दो साल से अधिक समय से महामारी के कारण आम नागरिकों को रोजगार खोना पड़ा है। साथ ही उसका असर महंगाई पर भी पड़ा है। आवास और शिक्षा के साथ स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ा है। सरकार को सभी वर्ग मतदान करते हैं।जबकि इनकम टैक्स सभी नहीं भरते हैं। इनकम टॅक्स भरनेवाले नागरिक को अन्य सुविधाएं नहीं मिलती है। जबकि भारत जैसे विशाल देश में एक समान कानून नहीं है l
हमारे देश में जैसे केंद्र और राज्य सरकारें दुर्बल घटक, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति योजनाओं में 75 वर्ष से बजट का बड़ा हिस्सा सरकार और नेता मिलकर खर्चा कर देते है। उसी तरह वोट देनेवाले नागरिक में भी जरूरतमंद, सामान्य मध्यमवर्ग की तरफ भी सरकार ध्यान देवें और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएं।
भारत में टैक्स देनेवाले नागरिक को महंगी बिजली,महंगा पानी, महंगी वस्तुएं, महंगी आवास पर खर्चा करना पड़ता है। जबकि प्रधानमंत्री आवास योजना में जटिल शर्त होने से मध्यम वर्ग परिवार को उसका उचित लाभ भी नहीं मिल रहा है। जबकि वोट सभी से लिया जाता है। यह भेदभाव गत 75 वर्ष से सभी राजनीतिक दल और नेता कर रहे है।
बैंक में ग्राहक को ब्याज सिर्फ पांच प्रतिशत दिया जाता है। साधारण नागरिक को ऊंची ब्याज दर पर ऋण दिया जाता है। जबकि वह ब्याज दरें 12 से 14 प्रतिशत तक बैंक वसूल रहे है। केंद्र सरकार प्रतिवर्ष बजट पर बढ़ोतरी कर रेल किराया बढ़ाती है।सभी तरफ से सामान्य मध्यम वर्ग परिवार और बिजनेस क्लास को सरकार के फायदे नही मिलते हैं।
सरकार राजनीति करके जनता की गाढ़ी मेहनत की कमाई सड़क, अल्पसंख्यक विकास और रिजर्वेशन क्लास पर जैसे खर्च करती हैं। अब आम साधारण नागरिक को भी उचित आवास योजना, स्वास्थ्य सुविधा, रोजगार गारंटी की सख्त आवश्यकता है। आम साधारण विद्यार्थियों के लिए बैंक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अंकों की कटौती 72 प्रतिशत रखा गया है। जबकि अन्य जातियों के लिए यह केवल 40 प्रतिशत ही रखा जा रहा है। देश में अब एक समान टैक्स, एक समान शिक्षा,स्वास्थ्य,आवास और रोज़गार के साधन की आवश्यकता महसूस हो रही है।
सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये के कारण आम सामान्य नागरिकों को कई सरकारी योजनाओं का लाभ गत 75 साल से नहीं मिल पा रहा है। आज अटल आरोग्य सुविधा सभी वोट देनेवाले नागरिक को मिलना चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय प्रधानमंत्री आवास योजना की भी अनेक देशवासियों और मध्यमवर्ग को जरुरत है। जीएसटी की ऊँची टैक्स दरों से सामान्य नागरिकों का जीवन कठिन होता जा रहा है।