न्यायालय, संविधान में व्यसन की मंजूरी नहीं फिर सरकार की छूट क्यों!
https://www.zeromilepress.com/2022/01/blog-post_977.html
नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। जैसा कि भारत के संविधान में धूम्रपान और मद्यपान को मंजूरी नहीं है। कोई भी फिल्म सिनेमाहाल या सार्वजनिक परिसर में दिखाने के पहले धूम्रपान और मद्यपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, ऐसा विज्ञापन दिखाया जाता है।
लेकिन महाराष्ट्र सरकार के तीन राजनैतिक दल की संयुक्त पार्टी के लीडर्स ने किराना दुकान पर शराब की खुलेआम बिक्री को मंजूरी देकर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए भारत के संविधान और कानून का उलंघन किया है।
उल्लेखनीय हो की सिगरेट पीने के पॉकेट पर और पान की दूकानों पर सरकार जुर्माना करती है। फिर किराना दुकान में शराब बेचने पर देश की अपराधिक मामलों को बढ़ावा मिलेगा। इसलिए ऐसे कानून को लागू करने से पहले विधानसभा,विधानपरिषद की सत्तापक्ष और विरोधी पार्टी का सर्वसामान्य जनता के लिए उचित मत लेना जरूरी है। कानून के अनुसार बिना ध्वनिमत के सांसद और विधानसभा में कानून बनाकर अवैध रूप से लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा।किराना दुकानों में शराब बेचने को लेकर लिया गया निर्णय यदि न्यायालय द्वारा मंजूरी दी गई है ,तो यह संविधान की घोर उपेक्षा है।
भारत सरकार के राष्ट्रपति से निवेदन है, कि भारत की जनता को मद्यपान और धूम्रपान वर्जित है के संविधान के कानून के हो रहे उलंघन पर पुनर्विचार करने का महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया जाए। आज शराब की सेवन की वजह से लिवर ख़राब हो रहे है, सड़क पर शराब के सेवन करने के कारण दुर्घटनाएं होती है। जैसाकि हमारे संविधान के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र में धूम्रपान की अनुमति नहीं है। फिर किराना दुकान पर शराब की बिक्री कैसे जायज हो सकती है।
किराना दुकान पर शराब की बिक्री से यदि किसी व्यक्ति को हानि पहुंचती हो और उसकी मृत्यु हो गई हो तो ऐसी स्थिति में कौन जिम्मेदार होगा। इसका जिक्र पैकेट या बोतल में भी होता है। फिर किराना दुकान जिम्मेदार या महाराष्ट्र सरकार। यह एक प्रश्न है।