महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा में 'मेरी कहानी' का हुआ आयोजन
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चावल के दानों का घरौंदा ढूंढे बदलाव वक्त
नागपुर। महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा में 'मेरी कहानी' का 19 फरवरी को शाम 6 बजे चिंतन कक्ष में आयोजन किया गया। सभी लेखकों ने अलंकार युक्त सभी रस से साराभोर कहानियां सुना श्रोताओं का मन मोह लिया।
इस कार्यक्रम की शुरुआत विधर्मी पड़ोसियों का मन मुटाव व सहयोग भावना का आदर्ष स्वप्न मीरा रायकवार ने 'बदलता वक्त' में सुनाया, 'घरौंदा' में माधुरी मिश्रा ने समाज में बेटियों को प्रौढ़ होते मां बाप का रखरखाव व स्वयं के विवाह को आज की कसौटी पर खींचा। वही सरकार द्वारा चलाई जा रही पोषक आहार प्रणाली के माध्यम से लाचारी गरीबी का गणेश पात्र के माध्यम से भूखा भावुक चित्र 'चावल के दाने' में सुरेखा देवघर एन ए प्रस्तुत कर वाह वाही लूटी।
डॉ. शशि वर्धन शर्मा शैलेश ने 'चरण स्पर्श' कहानी में दरकते सनातन संस्कारो का ताना बाना कसा तो प्रकाश काशिव ने 'विनम्रता' के लिए झुकने को जायज ठहराया। विजय मोकाशी ने किसानों की दुर्दशा पर 'मेरा भारत महान' के माध्यम से अपनत्व, व्यापार का चित्र खींचा और मनोभावों को सर्वोपरि रख किसान के समर्थन में मूक विरोध कर जलेबी का त्याग किया। जयप्रकाश सूर्यवंशी किरण ने नगरों में घर से कचरा उठाने वाले प्रणाली का भ्रष्ट आचरण का एक चित्र 'मन की बात' में संवाद रुपी कहानी से प्रस्तुत किया।
'दिल की सुनो' में नरेंद्र परिहार ने सगाई उपरांत शहीद जवान की याद में बिखरी नारी के लिए स्वयंवर का बहाना बना व्यंग शैली में नारी के सम्मान व विवाह को प्रेरित कर समाज में आवश्यक बदलाव का नया नाद किया। प्रभा मेहता ने 'समझौता' के माध्यम से नई तकनीकी में आए सार्थक बदलाव से प्रदेश में रहते बच्चों, अपनी प्रौढ़ अवस्था में स्वयं को समाधान रखने का नया पाठ पढ़ाया।
कार्यक्रम में ज्योति राव लढके, बसंत काले, हर्षवर्धन शर्मा ने अपनी सटीक टिप्पणियों से कहानी की समीक्षा तो की और समय काल को देख कहानियों में बदलाव लाने के लिए लेखकों से अनुरोध भी किया। संचालन कार्यक्रम सह संयोजक डॉ. विजय कुमार श्रीवास्तव ने अपनी लघु कथा मालिक, दासता, विवस्ता, आवश्यकता को 'सयोग' लघु कहानी में प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रभा मेहता ने रखी व आभार संस्था के अध्यक्ष की तरफ से नरेंद्र परिहार ने किया।