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'दिल जो भी कहेंगा मानेंगे' एक सुरेल प्रस्तुती


श्रेयस संस्था का गुणवत्तापूर्ण आयोजन

नागपुर। हिंदी फिल्म संगीत का जादू श्रोताओं के जहन में हमेशा से रहा है. कई पिढ़ियां बदल गई हैं लेकिन श्रोताओं के दिमाग में वही गीत आज भी स्मरण मे रहते हैं। आठ रास्ता चौक स्थित साइंटिफिक हॉल में इसी तरह के संगीतमय गीतों का कार्यक्रम आयोजित किया गया। एक से बढकर एक सुरीले गीत सुन कर श्रोताभी भावविभोर हो गये।  वन्स मोर की प्रशंसा करते हुए श्रोताओं ने कई गानों पर उत्साह से अपनी प्रतिक्रिया दी।

श्रेयस संस्था की ओर से 'दिल जो भी कहेगा..' हिंदी फिल्मी गीतों यह का मधुर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अनूठे कार्यक्रम की संकल्पना पंकज निमिषे इनकी थी । कार्यक्रम का निवेदन श्वेता गर्गे इन्होने किया। विजय कलवे ने कार्यक्रम की शुरुआत 'दिल जो भी कहेगा.. 'शीर्षक गीत से की। कार्यक्रम मे ‘माई रे मै कैसे कहू.., है अपना दिल तो आवारा, कलियोंने घुंघट खोले, चंदन सा बदन, जुंबां पे दर्द भरी दास्तां चली आयी, आज कल पांव जमी पर नही पडते मेरे.., ये मेरा दिवानापन है, छोड दो आँचल, तेरे मेरे सपने, हमे और जिने की चाहत ना होती, इतना मुझसे तू प्यार बढा, जाने कहा गये वो दिन, जिवन के सफर मे राही, दिवाना हुआ बादल, आनेवाला पल जानेवाला है, लागा चुनरी मे दाग...

आदी अनेक गीत गायकों ने मधुरतासे पेश किए। कार्यक्रम के अंत में अविनाश और मनीषा चन्ने ने 'सून जा आ थंडी हवा.. 'गीत की प्रस्तुति दी। जब की कार्यक्रम गीतों का रंग चढा हुआ था. ये कार्यक्रम खत्म ना हो ऐसा लग रहा था पण कार्यक्रम का समारोप हो गया।
पवन मानवतकर, अशोक टोकलवार, विशाल दहशस्त्र और नितिन अहिरे विभिन्न वाद्ययंत्रों के साथ गायकोंको साथ दे रहे थे। गायक जयंत नांदापुरकर, जयराज मार्कंड, श्रीकांत पैठणकर, चेतन एलकुंचवार, प्रकाश कुळकर्णी, विजय कालवे, पंकज निमिषे, अविनाश चन्ने, राखी काटोलकर, मनिषा चन्ने, अनुजा जोशी, विलास देशकर, मानसी बढे इन्होने हर गाने को दर्शकों की खुशी के लिए अपने खास अंदाज मे परफॉर्म किए। मंच की साज-सज्जा राजेश अमीन ने, साउंड सिस्टम बंडू पद्म ने और लाइटिंग सिस्टम आशिष आगरकर ने किया।
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