फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. रोहन अकोलकर स्विट्जरलैंड कांफ्रेंस मे होंगे सम्मिलित
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक चिकित्सा पद्धति के जनक
नागपुर/बारामती। इन्टरनेशनल ओलिम्पिक कमिटी के मेडिकल डायरेक्टर रिचर्ड बजट ने भारत के फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. रोहन अकोलकर को स्विट्जरलैंड मे कांफ्रेंस मे सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया है। यह कांफ्रेंस ओलिम्पिक एथलीटों के स्वास्थ्य की जांच पड़ताल के बारे मे नियम तैयार करेगी।
इसके पहले भी डॉ. रोहन अकोलकर ने फ्रांस मे आयोजित 29 वीं आयसो'कायनेटिक - फिफा मेडिकल एक्ससेलेन्स कांफ्रेंस जून 2022 मे फीफा प्रमाणित फुटबॉल मेडिसीन एक्सपर्ट के नाते योगदान दिया है। रशिया मे आयोजित 2018 फीफा वर्ल्ड कप मे डॉ. रोहन अकोलकर का सराहनीय योगदान रहा है। इसलिए, कतर मे आयोजित आगामी 2022 फीफा वर्ल्ड कप मे भी डॉ. रोहन अकोलकर बतौर फिजियोथैरेपिस्ट मौजूद रहेंगे।
जीवन में कुछ लोग अपनी अद्भुत प्रतिभा तथा भाग्य से अभूतपूर्व ऊंचाइयों को छू लेते हैं इन्हीं में एक है महाराष्ट्र के सांगोला तहसील अंतर्गत ग्राम अकोला में जन्मे डॉ. रोहन अकोलकर। मृदुभाषी तथा परोपकार की भावना के साथ आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में इनका विश्व प्रसिद्ध जाना पहचाना नाम है, जो भारत में पल्सड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक चिकित्सा पद्धति के जनक माने जाते हैं। उनका चयन मीट द यूनिवर्स ऑफ स्पार्ट, फुटबॉल मेडिसिन के चिकित्सक रूप में भी हुआ। जो भारत के लिए गौरव की बात है। ऐसे वह पहले भारतीय है।
डॉ. रोहन अकोलकर की प्राथमिक शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय से शुरू हुई और 2008 में नासिक व विश्वविद्यालय से मेडिकल की डिग्री प्राप्त की। 2010 में फिजियोथैरेपी की डिग्री प्राप्त कर, 2011 में पुणे विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री आफ फिजियोथैरेपी प्राप्त की। साथ ही हॉस्पिटल मैनेजमेंट एवं हेल्थ केयर में पुणे विश्वविद्यालय से ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपनी मेधावी क्षमता का परिचय दिया।
महाराष्ट्र के अति पिछड़े अकलुज ग्राम से अपनी चिकित्सा सेवा शुरू कर, प्रधान चिकित्सक बने।
समय उपरांत सरकार द्वारा डाक टिकट जारी होने वाली विभूतियों पर शोध निबंध लिखा, जिस की चारों और सराहना हुई। इसी शोध निबंध पर डॉ रोहन को फिले टैलिक ब्यूरो भारतीय डाक विभाग के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया। उन्होंने इस निबंध में डाक टिकटों के अनोखे इतिहास के बारे में दिलचस्प जानकारी दी। एक अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के द्वारा इसी शोधं निबंध पर डॉ रोहन को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। रेड क्रॉस सोसायटी द्वारा संचालित विकलांग बच्चों के स्कूल का जिम्मा भी सौंपा गया।
इसी सोसायटी के संचालन के दौरान डॉ. रोहन की मुलाकात विश्व के मशहूर चिकित्सक एवं यूनाइटेड नेशन के अल्टरनेटिव मेडिसिन विभाग के संचालक डॉक्टर शार्नटन स्टीटर से हुई। उनके निर्देशन में डॉ. रोहन ने बायो फीड साइंस का अभ्यास किया और भारत में पहली बार विद्युत चुंबकीय लहरों से उपचार पद्धति का श्री गणेश हुआ। अंग्रेजी में इसे इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड अथवा पल्सड कहा जाता हैं। इस उपचार पद्धति मैं मशीन से जोड़ों के दर्द जैसे घुटनों, कंधे आदि का दर्द ऑपरेशन के बिना सफल पूर्वक, ठीक किया जाता है।
गरीब, दलित, वंचितो की सेवा करना मेरा परम धर्म:
डॉ. रोहन अकोलकर कहते हैं कि महा मानव डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन दर्शन मेरी प्रेरणा रही है। दीन, दुर्बल, विकलांग, गरीब, दलित, वंचितो की सेवा को परम धर्म मानता हूं। मानव सेवा ही वास्तव में ईश्वर सेवा है। समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर मानवता के लिए काम करने को समर्पित हूं। वैश्विक स्तर पर फीफा मेडिसन चिकित्सक के रूप में जो विशेष भूमिका मिली है, उसके द्वारा अपने देश को विशेष पहचान दिलाने में अथक प्रयास करता रहूंगा।
आंतरराष्ट्रीय फुटबाल मेडिसिन विश्व परिषद में किए गए आमंत्रित फिफा मेडिकल सेंटर ऑफ एक्सलन्स, स्विट्जरलैंड और आयसोकायनाटीक मेडिकल गृप इटली द्वारा आयोजित आंतरराष्ट्रीय फुटबाल मेडिसिन विश्व परिषद में सम्मिलित होने हेतु बारामती के डॉ. रोहन अकोलकर को कई पुरस्कारों से नवाजा गया जिनमें मुख्यता पत्रकार महासंघ मुंबई के द्वारा 2006 में प्रेरणा पुरस्कार, 2016 में महात्मा फुले टैलेंट रिसर्च पुरस्कार, 2016 में ही यूनेस्को इंटरनेशनल कॉन्फिडेरेशन द्वारा सामाजिक पुरस्कार, भारतीय डाक विभाग द्वारा भी डॉ. रोहन की उपलब्धियों को मद्देनजर रखते हुए डाक टिकट जारी किया गया है। भारत का नाम रोशन करने वाले डॉ. रोहन को मित्र परिवार तथा शुभचिंतकों ने बधाई और शुभ कामनाएँ दी है।

