ग्रामांचल में जीवित है मुहावरे और कहावतें : डॉ. संजय दीक्षित
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नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन, हिंदी मोर भवन, सीताबर्डी, नागपुर में 'चौपाल' उपक्रम के अंतर्गत 'कहावतें और मुहावरों की प्रासंगिकता' इस विषय पर दिनांक 23 फरवरी 2026 को संयोजक विजय तिवारी व सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे के मार्गदर्शन में परिचर्चा का आयोजन किया गया।
संजय हरिचरण प्रसाद दीक्षित, संचालक, भूमि कंट्रोल, कानपुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। मुख्य अतिथि संजय दीक्षित ने ही विद्या की देवी, वीणा वादिनी, माता सरस्वती की वंदना गीत गाकर परिचर्चा का आरंभ किया।
परिचर्चा में मदनगोपाल वाजपेई ने रामायण के एक से बढ़कर एक प्रसंग व कहानी के आधार पर आज तक जीवित रहने वाली कहावतों और मुहावरों का वर्णन किया। इसके पश्चात धीरज दुबे ने हिंदी साहित्य में कहावत और मुहावरों का महत्व बताया व वर्तमान में शालाओं में हिंदी शिक्षा पर ज्यादा ध्यान आकर्षण करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
श्री महाजन ने अनेक कहावतों और मुहावरों का वर्णन व उपयोग करते हुए अपने विद्यार्थी जीवन को याद किया। रमेश मौदेकर ने चौपाल के उपक्रम की सहारण की व उन्होंने अपने व्यक्तव्य में इंग्लिश व हिंदी के अनेक कहावतों का उपयोग किया व उसका महत्व बताया। एड. जगत बाजपेई ने हिंदी साहित्य में उपयोग में आने वाले कहावतों का जन्म, उसकी उपयोगिता व भ्रंशित कहावतों का शुद्धिकरण करते हुए उनका इंग्लिश हिंदी व मराठी तीनों भाषाओं में वर्णन करते हुए उनकी उपयोगिता पर अपने विचार व्यक्त किये। उन्होंने बहुत ही विस्तार से अनेक प्रकार की कहावत और मुहावरों का उपयोग करते हुए उसकी प्रासंगिकता और महत्व को समझाया।
सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे ने एक प्रसंग के माध्यम से ग्रामीण अंचल में कहावत और मुहावरों से रचित कविता प्रस्तुत की और इसी प्रकार अनेक छोटे- बड़े कहावत और मुहावरों का बड़े ही सुंदर ढंग से प्रस्तुतीकरण दी। परिचर्चा के बीच-बीच में संयोजक विजय तिवारी ने भी अनेक जीवंत प्रसंग से जन्म लिए हुए कहावतें मुहावरों का बहुत ही हंसी के माहौल में वर्णन किया। डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने भी अपनी कविता की शैली में कहावत और मुहावरों का सुंदर वर्णन किया। इस प्रकार परीचर्चा में अन्य श्रोताओं ने भी बढ़- चढ़कर भाग लिया।
अंत में डॉ श्री कृष्ण कुमार द्विवेदी ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्व श्रीमती जया धोके, किशोरी गणवीर, सर्वश्री संजय शर्मा, अमरीश दुबे, मोहन तिवारी, सचिन शुक्ला, शंकर मेश्राम, राजेश अग्रवाल, सौरभ शुक्ला, रवि शर्मा शत्रुघ्न तिवारी सचिन शुक्ला रोशन सिंह वैभव शर्मा इत्यादि लोगों ने अपना अमूल्य योगदान दिया।