Loading...

मानसिक अवसाद से धूमिल होली!




होली का त्यौहार नजदीक आने के साथ ही रंगों की चर्चा स्वाभाविक है, जैसे जीवन की पूर्णता के लिए आवश्यक तत्वों की व्यवस्था हो रही हो। वैसे तो प्रत्येक दिन हम सबके जीवन में नए अनुभव लेकर आता है, जिसमें सुख-दुख, अट्टहास और सिसकियाँ, विजय और पराजय जैसी विभिन्न भावनाएँ शामिल हैं। लेकिन इन रंगों का सही अर्थ तभी समझ में आता है जब हमारा मन इन सब विविधताओं को स्वीकार करने के लिए तैयार होता है, अन्यथा जीवन नीरस और बेरंग प्रतीत होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से तो यह धरती रंगों से परिपूर्ण है, प्रकाश के विभिन्न स्पेक्ट्रम हमें इसके बारे में जानकारी देते हैं, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण भौतिक रंगों से परे जीवन के विभिन्न आयामों में निहित गहरी भावनाओं से संबंधित है। 

होली का त्यौहार वास्तव में रंगों के माध्यम से इनमें निहित प्राकृतिक गुणों और सकारात्मक संदेशों को मानवीय भावनाओं के साथ जोड़कर लोगों को एकत्रित करने का अवसर प्रदान करता है। ताकि त्यौहार के बहाने सब एक दूसरे से रूबरू हों, चारों तरफ हर्ष और उल्लास छा जाए, जो मानव मन की बुराईयों जैसे ईर्ष्या, द्वेष, छल-कपट, अहंकार या दुख, निराशा, हीन भावना जैसी कमजोरियों को सहजता से परास्त कर जीवन को सकारात्मकता की नई ऊर्जा से भरने में सहायक होता है, जो हमें जीवन की सच्चाई और खुशियों की ओर ले जाता है।

हाल ही में, नववर्ष की शुरूआत में ही मैंने कुछ प्रियजनों को प्रत्यक्ष देखा है जिन्हें जीवन की वास्तविकता के एक बेहद कठिन इम्तेहान से गुज़रना पड़ा है, उनकी खुशियों से भरी दुनिया अचानक से बेरंग हो गई है। उनके जीवन का आधार स्तंभ टूट गया है, और वे गहरी उदासी में डूब गए हैं। उनके पास भले ही जीने के लिए बाकी सब कुछ, पर्याप्त धन-दौलत, सुख-सुविधाएं, ढेरों परिजन, मित्र मण्डली सब कुछ हो, लेकिन जिस एक व्यक्ति ने उनके जीवन को अर्थ दिया था, उसकी अनुपस्थिति ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया है। वे एक ऐसे सूर्य थे जो उनके जीवन में प्रकाश और रंग भरते थे, उनकी मौजूदगी ही जैसे उनके लिए होली-दिवाली थी, और अब उनकी अनुपस्थिति में सब कुछ अधूरा लगता है। लेकिन, वक्त ने उन्हें सिखाया है कि जिंदगी की इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा और आगे बढ़ना होगा। उन्हें अपने आप को संभालना होगा, आत्मविश्वास से लबरेज होना होगा, और जीवन में फिर से रंग भरने के लिए हिम्मत और हौसले के साथ खुद से ही खुद का हाथ थामना होगा। 

यह एक बेहद कठिन यात्रा है, लेकिन असंभव नहीं। उन्हें अपने जीवन में सकारात्मकता लानी होगी, और ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जो उन्हें फिर से जीवन की सुंदरता का एहसास दिलाए। नयी चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें अपने भीतर की शक्ति को पहचानना होगा और उसे जगाना होगा। उन्हें यह समझना होगा कि हर कठिनाई एक अवसर है, और हर दर्द एक सबक है। भगवान की लीला होती है उनका कोई बड़ा उद्देश्य होता है। इसलिए  हार मान कर रूकना नहीं है, अपने सपनों को फिर से जीने का साहस जुटाना होगा और अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ना होगा। अपने जीवन को नए अर्थ और उद्देश्य से भरना होगा और एक उज्जवल भविष्य की ओर बढ़ते हुए जीवन सार्थक बनाना होगा।

जिन लोगों का जीवन वर्तमान में सुख और समृद्धि के रंगों से परिपूर्ण है उनका पुण्य कर्तव्य है कि होली जैसे पावन पर्व पर अपने आसपास के दुख और उदासी से घिरे लोगों को नई ऊर्जा और आशा से प्रेरित करें। उन्हें अपनत्व का गहरा एहसास दिलाकर, खुशियों की बहार लाने का प्रयास करें। तभी हम मनुष्यों के सामाजिक प्राणी होने की सार्थकता है। वहीं मानव समाज का एक बहुत बड़ा हिस्सा नकारात्मक सोच/भावनाओं से ग्रसित हैं। ऐसे लोगों को तिरस्कृत करने के बजाय, प्रेम और सहानुभूति के साथ उन्हें जीवन की सच्चाई का एहसास दिलाएं, जिससे उनका ह्रदय परिवर्तन हो सके। जीवन साथ मिलकर जीने का नाम है, और जब हम मिल-जुलकर चलते हैं, तभी मानव समाज सर्वोत्तम बनता है। वसुधैव कुटुम्बकम का अर्थ है संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानना, और यही आदर्श हर किसी की जिंदगी में सकारात्मकता ला सकता है। आइए, होली के इस पावन पर्व पर हम सब इन कोशिशों को जारी रखें और फिज़ा रंगीन बनाएं।

- शशि दीप, मुंबई
shashidip2001@gmail.com
लेख 5324174004262023374
मुख्यपृष्ठ item

ADS

Popular Posts

Random Posts

3/random/post-list

Flickr Photo

3/Sports/post-list