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T 20 क्रिकेट विश्व कप : संकल्प मे सिमटी है सफलता की कुंजी


7 फरवरी से 8 मार्च 2026 तक एक माह चले क्रिकेट के सबसे तेज फॉर्मेट का भारत एवं श्रीलंका मे संयुक्त रूप से आयोजित महाकुंभ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ । 20 देशों के 300 खिलाडियो ने अपनी कला, क्षमता और मानसिकता का प्रदर्शन कर इस प्रतियोगिता को आकर्षक और रोमांचक बनाये रखने मे कोई कसर बाकी नही छोडी । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समिती ( आय सी सी) के मैराथन प्रयास, आनेवाली प्रत्येक चुनौती का गुणवत्ता के आधार पर निराकरण करना इस विश्व कप को अविवादित बनाये रखने मे महत्वपूर्ण रहा । 

पाकिस्तान और बांगलादेश ने आयोजकों हेतु भ्रम निर्माण करने एवं दबाव बनाने के प्रयासो को अत्यंत कुशलतापूर्वक निपटारा किया गया, अंततः अंतिम क्षणों मे बांगलादेश की जगह स्कॉटलंड की टीम को सम्मिलित कर आय सी सी ने अपने दृढ संकल्पों का परिचय दिया । व्यक्तिगत स्वार्थपरक राजनिती को खेल से दूर रखने का प्रयास भी सफल होते हुए सभी ने देखा । खेल , खिलाडी से बडा होता है । टूर्नामेंट के मध्य मे पश्चिम एशिया एवं इसके तटीय परिक्षेत्र मे युद्ध आरम्भ हो चुका था इसके बावजूद भी प्रतियोगिता बाधित नही होना मानवीय प्रयास एवं ईश्वरीय कृपा ही समझा जाना चाहिये ।

हांलाकी दक्षिण आफ्रिका और वेस्ट इंडिस की टीमो की अभी तक स्वदेश वापसी नही हो सकी है, पूर्ण प्रयास किए जा रहे है की अगले सप्ताह यह दोनो टीमो के खिलाडी अपने अपने देश पहुच जाए । प्रतियोगिता की सफलता का मापदंड तय करने मे यह आंकडे प्रभावी रहेंगे की फाइनल मैच को 1 करोड़20 लाख से ज्यादा दर्शकों ने इसे मैदान पर देखा एवं 82 करोड से अधिक लोगो ने इसे जिओ हॉटस्टार के माध्यम से लाइव प्रसारण देखने का आनंद लिया ।

               प्रतियोगिता मे शामिल 20 देशों को 4 ग्रुप मे विभाजित किया गया था और लीग चरण के मैचो के पश्चात प्रत्येक ग्रुप से शीर्ष 2 टीमे आगे क्वॉर्टरफाइनल के लिए क्वालिफाइ हुई । 
प्रतियोगिता के संभावित विजेताओ हेतू दक्षिण आफ्रिका, न्यूझीलंड, वेस्ट इंडीज, इंग्लंड और भारत का नाम क्रमशः प्राथमिकता पर लिया जा रहा था । लीग चरण के मुकाबले अत्यंत रोमांचक रहे । क्रिकेट के लिए कम अनुभवी देशों के खिलाडियो ने भी लगभग प्रत्येक मैच को फोटो- फिनिश अवस्था मे लेकर गये । 

ऑस्ट्रेलिया जैसी बडी टीम की लीग चरण में ही विदाई यह दर्शाती है की प्रतियोगिता की सभी टीमें अत्यंत प्रतिस्पर्धी थी । अफगानीस्तान और दक्षिण आफ्रिका का मैच तो दो सूपर ओवर तक गया, और यहां पर काम आया अनुभव । अंततः टूर्नामेंट एक और बडे उलटफेर से बच गया । प्रतियोगिता के सभी मैच खेल- भावना को जीवंत रखकर खेले गये । फाइनल मैच मे अर्शदीप सिंग का डॅरिल मिचेल को रन आउट करने के लिए फेका गया थ्रो शरीर पर लगने के पश्चात कप्तान सुर्यकुमार द्वारा मिचेल से सॉरी कहना और विश्व विजेता बनने के जश्न के दौरान अर्शदीप सिंह का मिचेल के पास जाकर खेद प्रगट करना इसके उदाहरण है ।

              पूर्वानुमान को सही ठहराते हुए न्यूझीलंड- दक्षिण आफ्रिका, इंग्लंड- भारत की टीमो के बीच सेमीफायनल मुकाबले खेले गये । अंततः फाइनल मैच का दिन भी आया, न्यूझीलंड बनाम भारत।
फाइनल मुकाबले सेपहले कोच गौतम गंभीर का टीम को किए संबोधन ने टीम मे अतिरिक्त ऊर्जा का संचार कर दिया । उन्होंने खिलाडियो से कहा कि , “ आप द्विपक्षीय १०० मुकाबले जीत लो आपको विशेष फर्क नही पडेगा,लेकिन  विश्व कप का विजेता बनना आपको जीवन भर यादगार रखेगा, इसे जीतने के मायने आपका जीवन रूपांतरीत कर देंगे । “
             सेमीफायनल मुकाबले मे न्यूझीलंड की टीम ने जिस प्रभावी तरीके से खेलकर दक्षिण आफ्रिका को बुरी तरह पराजित किया था एवं भारत की इंग्लंड पर एक नजदीकी जीत को देखते हुए फाइनल मुकाबले मे न्यूझीलंड की टीम का पलडा भारी दिखाई दे रहा था । भारतीय टीम के लिए अनेक मिथक भी आंकडो के माध्यम से दावेदारी को कमजोर आंकते नजर आ रहे थे । 

प्रथम - किसी मेजबान देश ने टी 20 का फाइनल जीता नहीं है, दूसरा- किसी भी टीम ने लगातार दो बार यह खिताब जीता नहीं है, तीसरा- कोई भी देश ३ बार विश्व-विजेता नहीं बन पाया है । इसके अलावा अहमदाबाद के स्टेडियम पर  २०२३ के विश्व कप मे मिली ऑस्ट्रेलिया के हाथों मिली हार के भी अनुभव थे ।

            फाइनल मुकाबले मे पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 255   रनो का विशाल स्कोर बना लिया था, यह स्कोर ३०० रनो के आसपास भी पहुंच जाता लेकिन जैम निशाम ने १६ वे ओवर मे ३ प्रमुख बल्लेबाजो को आउट करके रनो की गती पर अंकुश लगाने का काम किया । सामान्य परिस्थितीयों मे २० ओवर मे यह एक सुरक्षित स्कोर माना जा सकता है लेकिन सेमीफायनल मुकाबले मे न्यूझीलंड के बल्लेबाजो के आक्रामक तेवरो को देखते हुए भारतीय समर्थको के बीच कुछ आशंकाए जन्म ले चूकी थी । 

               भारतीय गेंदबाजो अक्षर पटेल, जसप्रीत बुमराह और अन्य ने शुरुआत से ही अच्छी गेंदबाजी करते हुए 7.4 ओवरो मे 5 विकेट चटकाकर खेल को एक तरफा कर लिया था, इसके बाद तो मात्र औपचारिकतांए ही पूरी होती दिखाई दी । भारतीय टीम ने सभी मिथको को झुठलाते हुए न्यूझीलंड को 96 रनो से हराकर टी २० क्रिकेट का लगातार दूसरी बार खिताब अपने नाम करते हुए कुल तिसरी बार क्रिकेट के इज़ सबसे छोटे फॉर्मेट में अपनी बादशाहत स्थापित की । 

            कोई अचानक एक दिन में विश्व-विजेता नहीं बन जाता, इसके लिये दूरदृष्टीता भरे निर्णय, गुणवत्ता, बहादुरी एवं आपसी विश्वास बनाए रखना आवश्यक होता है । कप्तान सूर्यकुमार यादव का अभिषेक शर्मा को यह कहना की विश्व कप के कुल 9 मॅचेस मे तुम यदी 8 बार भी शून्य पर आउट हो जाओगे फिर भी मै तुम्हे 9 वी बार भी मैच की पहली गेंद खेलने का अवसर दुंगा, यह आपसी विश्वास को दर्शाता है और अभिषेक शर्मा ने फाइनल मुकाबले मे 18 गेंद पर बनाए 50 रन इसी विश्वास को बनाये रखने हेतू आत्मविश्वास प्रदान करता है । कोच गौतम गंभीर ( गौती) ने इस ट्रॉफी को राहुल द्रविड द्वारा की गई मेहनत, व्ही व्ही व्ही एस लक्ष्मण के द्वारा किए गये सकारात्मक अनुकुलनता का निर्माण और चीफ सिलेक्टर अजित आगरकर के पिछले 1.5 वर्षों मे लिए निर्णयों को समर्पित किया है । 

कर्म की धारा का एक किनारा अहंकार होता है, जो सफलता आने पर प्रभावी हो जाता है । अहंकार कर्म को स्वयं का फल मानकर बंधन पैदा करता है, अहंकार कर्म का कर्ता बन जाता है । लेकिन गौती भाई का विश्व कप विजेता बनने के बाद कहा गया कथन उन्हे अहंकार से दूर रखता है और इस विजय को तैयार करने वाली बुनियाद को ही समर्पित करना उचित ही है । जडे मजबूत रखनी चाहीए । पेड कितना ही आकाश कीओर बढ जाए, लेकिन जब तक जडे मजबूत रहेंगी, वह उंचाईयो पर बना रहेगा ।

कोच ने कहा की हमने प्रत्येक मैच मे प्लेइंग इलेवन खिलाडियो का चयन उम्मीदो के आधार पर नही अपितू खिलाडियो पर भरोसा रखकर किया था । यह टीम किसी 1  या 2 खिलाडियो के इर्दगिर्द घूमती नजर नही आई बल्की इसकी विशेषता यह रही की यदी किसी दिन कोई खिलाडी अपेक्षित प्रदर्शन नही कर सका तो दूसरे खिलाडियो ने अपने प्रदर्शन से इस कमी को पूरा किया ।खिलाडी व्यक्तिगत उपलब्धि की बजाए टीम की आवश्यकता को देखकर खेल रहे थे ,संजू सॅमसन के 97, 89, 89 रन इस बात का प्रमाण है ।

सेमीफायनल मैच के मैन ऑफ द मॅच विजेता बनने के बाद संजू सॅमसन का कहना की इसके असली हकदार तो जसप्रीत बुमराह थे, टीम भावना की ऊर्जा को प्रदर्शित करता है । दक्षिण आफ्रिका से मैच हारने के पश्चात कप्तान सूर्यकुमार ने टीम के वरिष्ठ खिलाडी हार्दिक पांड्या को सभी बॅट्समनो को आगे कैसा खेलना है इसको लेकर मार्गदर्शन करने हेतू कहना टीम की एकजुटता दर्शाता है । 

टूर्नामेंट शुरू होने से पूर्व तक भारतीय टीम की विश्व- विजेता बनने की संभावनाए अत्यंत क्षीण थी, लेकिन जैसा कोच ने कहा कि हमने खिलाडियो पर भरोसा रखा, उनके साथ लगातार चर्चा की, उनकी टीम मे भूमिका स्पष्ट की, जिससे टीम एक इकाई में बंधकर खेली । कप्तान की टीम खिलाडियो के साथ पारदर्शीता इसी से समझी जा सकती है कि दक्षिण आफ्रिका से मैच हारने के पश्चात उन्होंने अक्षर पटेल से कहा कि , तुम्हे टीम में शामील नही करना हमारी हार का कारण रहा ।

            लगातार ३ वर्षों मे ३ आंतरराष्ट्रीय खिताब जीतना, इसमें चयनकर्ताओ की भी अहम भूमिका रही है । चीफ सिलेक्टर अजित आगरकर के कुछ ठोस एवं कठोर निर्णय इन जीत का आधार रहे । हार्दिक पटेल की जगह सुर्यकुमार यादव को टी २० टीम का कप्तान बनाना, संजू सॅमसन को शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर के उपर प्राथमिकता देना, ऋषभ पंत, जितेश शर्मा की बजाए ईशान किशन पर भरोसा जताना ऐसे उनके अनेक निर्णय किसी के प्रश्न पूछने की  जगह इन खिलाडियो के प्रदर्शन से उत्तर देते नजर आए ।यह उनके पारखी दृष्टिकोन एवं विवेकपूर्ण समझ के संकल्पों को दर्शाता है ।

            शिवम दूबे जिनका रोल लास्ट एक्शन हिरो का था, उन्हे स्पष्ट निर्देश था कि रन रेट कम नहीं होना चाहीए , यह अपनी भूमिका के साथ संपूर्ण न्याय करते नजर आए और कुल 235 रन बनाए जिसमे 17 छक्के एवं 15 चौके शामिल थे, फाइनल मैच के 8 बाल मे 26 रन इनके सिलेक्शन को उचित ठहराता है । अक्षर पटेल ने एक ऑल - राउंडर की की भूमिका बखूबी निभाई, विशेष रूप से नाजूक क्षणों में विकेट लेकर और अपनी फिल्डिंग से विपक्षी टीम पर जबरदस्त दबाव बनाए रखा ।सेमी- फायनल मैच मे उनका शिवम दुबे के साथ लिया गया कैच टूर्नामेंट के यादगार पलो मे शामील हो चुका है । 

जसप्रीत बुमराह की बात नही करना उनके साथ बेमानी होगा । बुमराह की भूमिका तो प्रत्येक मैच मे निर्णायक रही ।कप्तान द्वारा इनको भारतीय टीम का खजाँची निरूपित करना कोई अतिशयोक्ति नही है । इन्होने प्रत्येक मैच में विपक्षी टीम के विकेट लेकर अपनी टीम को विकेटो के खजाने से भरा ही है साथ ही अपने ओवरो मे कम रन खर्च करना इन्हे दी गइ उपाधी को न्यायोचित ठहराता है । विश्व क्रिकेट मे कुछ बॉलर्स सही मे बैट्समैन के लिए खेलने हेतू अत्यंत कठीन ( unplayable) होते है, लेकिन बुमराह ऐसे नही है, यह तो अनिश्चित( unpredictable) है । इनकी बॉलिंग एक्शन से बैट्समैन अंदाज ही नही लगा सकता कि गेंद कैसी आएगी । 

एक जैसी धीमी गेंद पर दक्षिण आफ्रिका के रयान रिकेल्टन, वेस्ट इंडीज के रोस्टन चेस, इंग्लंड के हैरी ब्रूक और न्यूझीलंड के रचीन रवींद्रन जैसे प्रमुख बल्लेबाजो को आउट करना यह दर्शाता है कि इनके दौडंने, चेहरे के हाव-भाव और एक्शन से गेंद की लेंथ और गति का पूर्वानुमान लगाना बहुत कठिन होता है । फाइनल मैच के अपने अंतिम ओवर मे एक जैसी स्लो यॉर्कर गेंद पर जैम निशाम, मैट हेनरी और मिचेल संतनेर को बोल्ड आउट करना उनकी इस प्रतिभा का लोहा मनवाता है ।  विश्व-विजेता बनने के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव का पिच की मिट्टी को अपने माथे पर मलना अपनी टीम के संकल्प की पूर्णता मिलने पर परमपिता के प्रति कृतज्ञता प्रदर्शित करने के साथ-साथ खेल के प्रति श्रद्धा एवं समर्पण को दर्शाता है । अपने कोच के चेहरे पर आई मुस्कुराहट उनके लिए सबसे अनमोल थी ।

           विश्व-कप विजेता बनने पर बी सी सी आय ने टीम के लिए 131 करोड़ की राशी घोषित की है साथ ही फाइनल जीतने पर आय सी सी की विजेता राशी 21 करोड़ भी टीम को प्राप्त हुई है । इस पुरे आयोजन से खेल के माध्यम से विश्व को शांती बनाए रखने का संदेश प्राप्त होगा ऐसी हम सभी आशा करते है।

- जितेंद्र शर्मा, खेल समीक्षक
   नागपुर, महाराष्ट्र 
   
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