कोच्चि में ऑथर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया का स्वर्ण जयंती अधिवेशन संपन्न
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नागपुर/कोच्चि। ऑथर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के 50वें अधिवेशन में एर्नाकुलम के सांसद श्रीमान हिबी एडेम मुख्य अतिथि ने उद्घघाटन करते हुए अपने संबोधन में कहा, समाज के निर्माण में साहित्य सर्वोपरि है। आज लेखक की स्वतंत्र लेखनी पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। जो राष्ट्र की सार्वभौमिकता पर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं। साथ में उन्होंने केरल राज्य और कोचिंग के स्वर्ण इतिहास वर्णित कर उसके महत्व को भी समझाया। उनका मत था मौलिक लेखन ही समाज की संवेदनाओं की धड़कन समझ उसे नए रहा का पथ प्रदर्शक बन खड़ा होना होता है।
इस अवसर पर देश के विभिन्न अंचल दिल्ली, गाजियाबाद, लखनऊ, पंजाब, मध्य प्रदेश, मुंबई , नागपुर, चेन्नई, हैदराबाद, कर्नाटक, चिदंबरम, केरल से लगभग 130 साहित्यकारों की उपस्थिति में संस्था के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सुरेश ढींगरा जी ने संस्था के इस सुनहरे सफर का झरोखा रख अतिथियों का आभार माना। इस अवसर पर संस्था के महासचिव डॉ शिव शंकर अवस्थी ने अपनी प्रस्तावना में संस्था के 50 वर्षों के महत्वपूर्ण कार्यों का और संस्था के लेखक और प्रकाशक के बीच संस्था के सेतु से किए कार्यों का उल्लेख किया।
इस अवसर पर केरल के प्रसिद्ध हिंदी और मलयालम साहित्यकार प्रो एम. थॉमस मैथ्यू के सामाजिक, साहित्यिक अवदान को देखते हुए उनके जीवन उपलब्धियां का सम्मान प्रतीक चिन्ह देकर किया गया। उनके साथ प्रमुख अतिथि श्री एडेन संस्था के स्थानीय संयोजक डॉ वर्गीश, महासचिव डॉ शिव शंकर अवस्थी और नरेंद्र परिहार को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित कार्यक्रम अध्यक्ष और अतिथि के हस्ते सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर साहित्यकार मैथ्यू द्वारा भारत और पुस्तक संस्कृती विषय पर बीज वक्तव्य रखा गया, उन्होंने कहा पुस्तकों को पढ़ना चाहिए जो लिखा है वह समाज का मार्गदर्शन तो करता है परंतु आर्थिक प्रगति के द्वार खोलना है। पुस्तक संस्कृती ने अनुवाद से हमें एक दूसरों को क्षेत्रीय साहित्य को समझने का अवसर भी मिला।
प्रपत्रों के वचन के साथ शाम को क्रूज पर 42 कवियों द्वारा मलयालम तमिल मराठी हिंदी अंग्रेजी में कविताएं प्रस्तुत की गई। संचालन नागपुर चैप्टर के संयोजक नरेंद्र परिहार ने किया और अध्यक्षता श्री हरीश अरोड़ा ने की इस अवसर पर आभार संस्था के महासचिव डॉक्टर शिव शंकर अवस्थी ने माना। चार तकनीकी सत्र में संस्था के 32 विद्वानों द्वारा पुस्तक संस्कृति पर मलयालम, इंग्लिश, हिंदी में प्रपत्र की प्रस्तुती की गई।
सभी विद्वानों ने जहां पुस्तक प्रकाशन, पढ़ने के महत्व को समझाया वहीं भारत की अनेकता में एकता की विरासत संस्कृति और आध्यात्मिक बदलाव की उपयोगिता को आचरण में लाने का मत समझाया और स्तरीय लेखन के महत्व और गुणवत्ता की प्रासंगिकता पर मत रखे गए। आज पुस्तक प्रकाशन में बहुत अधिक आ रही हैं । जिनका स्वागत होना चाहिए। इसके लिए लेखक और पाठक को गहन अध्ययन के साथ सामाजिक सरोकारों और संस्कृति के मूल तत्वों का ज्ञान होना चाहिए।
इस अवसर पर संस्था के सभी सदस्यों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर नागपुर चैप्टर के प्रपत्र प्रस्तुति में नेहा भंडारकर, लक्ष्मण डेहरिया, प्रकाश काशिव, लक्ष्मी यादव, परशुराम डेहरिया और नरेंद्र परिहार थे। काव्य पाठ में श्रीमती सुधा काशिव, सुनीता मुल्कुलवार, चित्रा चिंचघरे, ज्योति गजभिए, अजय पांडे, डॉ कृष्ण कुमार द्विवेदी, डॉ बालकृष्ण महाजन, डॉ प्रभात शर्मा और नरेंद्र नायटे ने अपने काव्य रचना प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम के समापन समारोह हिंदी मलयालम के विद्वान प्रोफेसर एंड थॉमस ने केरल की साहित्यिक, सांस्कृतिक चित्र को रखा और दो दिन के इस अधिवेशन को सफल निरूपित किया और कहा साहित्यकारों का कर्तव्य है समाज को जागरूक रखना और सत्यापित रखना।कार्यक्रम की अध्यक्षता डा सुरेश ढींगरा ने की। संस्था के महासचिव डॉक्टर शिव शंकर अवस्थी दें सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार माना।

