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गर्भाशय ग्रीवा कैंसर : बढ़ती चुनौती और रोकथाम के लिए जांच व टीकाकरण की बढ़ती आवश्यकता


नागपुर। गर्भाशय ग्रीवा कैंसर का अनुपात बढ़ रहा है और यह महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बनता जा रहा है। वर्ष 2025 के लिए भारत में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर की अनुमानित राष्ट्रीय मृत्यु दर 54% है।

महाराष्ट्र में, आईसीएमआर – नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नॉनकम्युनिकेबल डिजीज एपिडेमियोलॉजी (ICMR-NINE) के अनुसार वर्ष 2022, 2023 और 2024 में गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के अनुमानित मामलों की संख्या क्रमशः 4,752, 4,658 और 4,566 रही। इन्हीं वर्षों में राज्य में अनुमानित मृत्यु संख्या 2022 में 2,566, 2023 में 2,515 और 2024 में 2,466 दर्ज की गई। इन आंकड़ों के आधार पर महाराष्ट्र में मृत्यु दर 2022 में 54.0%, 2023 में 53.99% और 2024 में 54.01% रही, जो लगभग स्थिर बनी हुई है। ये आंकड़े इस बीमारी के प्रभावी नियंत्रण के लिए नियमित जांच (स्क्रीनिंग) और स्थानीय स्तर पर हस्तक्षेप की निरंतर आवश्यकता को दर्शाते हैं।

नागपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय आंकड़े, जो ICMR के हॉस्पिटल बेस्ड कैंसर रजिस्ट्री (HBCR) प्रोजेक्ट के अंतर्गत प्रधान अन्वेषक डॉ. बी. के. शर्मा और डॉ. करतार सिंह के नेतृत्व में संकलित किए गए हैं, पिछले तीन वर्षों में रोगियों के परिणामों की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं। वर्ष 2022 में इस क्षेत्र में कुल 387 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 294 मरीज जीवित रहे और 52 की मृत्यु हुई। इससे 13.44% मृत्यु दर और 75.97% जीवित रहने की दर दर्ज की गई। वर्ष 2023 में कुल 363 मामले दर्ज हुए, जिनमें 239 (65.84%) जीवित रहे और 58 (15.98%) की मृत्यु हुई। वर्ष 2024 के आंकड़ों के अनुसार कुल 184 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 121 (65.76%) जीवित रहे और 27 (14.67%) की मृत्यु हुई। यह ध्यान देने योग्य है कि HBCR अभी भी गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से संबंधित आंकड़ों का संग्रह कर रहा है, इसलिए इन वर्षों के कुल मामलों की संख्या आगे चलकर बढ़ सकती है क्योंकि अधिक जानकारी प्रक्रिया में शामिल की जा रही है।

नागपुर रजिस्ट्री में एक महत्वपूर्ण चुनौती 'अज्ञात' (Unknown) मामलों की संख्या है, जो उन रोगियों को दर्शाती है जिनका पता नहीं चल पाया। ऐसे मामलों की संख्या 2022 में 41, 2023 में 66 और 2024 में 36 रही। इस प्रकार के “अज्ञात” परिणाम चिकित्सकीय फॉलो-अप में गंभीर कठिनाइयाँ उत्पन्न करते हैं, क्योंकि स्वास्थ्य सेवा प्रदाता यह सुनिश्चित नहीं कर पाते कि मरीज ने उपचार पूरा किया है या नहीं, कैंसर की पुनरावृत्ति की निगरानी नहीं कर पाते और आवश्यक उपचारोपरांत देखभाल प्रदान करना भी कठिन हो जाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया है कि राष्ट्रीय एनसीडी पोर्टल के अनुसार 17 फरवरी 2026 तक देशभर में 8.73 करोड़ महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है, जो गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के खिलाफ चल रही राष्ट्रीय लड़ाई में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है। रोकथाम के उपाय के रूप में, 28 फरवरी 2026 को एक राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है, जो वर्तमान में चल रहा है। यह अभियान विशेष रूप से 14 वर्ष की बालिकाओं को लक्षित करता है और इसे सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों जैसे आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) और जिला अस्पतालों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
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