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साहित्यिकी में लघुकथा सम्मेलन


नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के साहित्यिकी में लघुकथा सम्मेलन का सफल आयोजन संपन्न हुआ। अध्यक्षता डाॅ भोला सरवर ने की। मंचासीन प्रमुख अतिथि डाॅ राम मुले का उत्तरीय से स्वागत संयोजक द्वय हेमलता मिश्र मानवी और शादाब अंजुम ने किया। आयोजन में एक से बढ़कर एक लघुकथाएँ एवं संस्मरण प्रस्तुत किये गये। सुषमा शर्मा ने दादाजी को समर्पित संस्मरण और उनके भजन हे प्रभु आनंद दाता सुनाकर कक्ष को भक्ति रस से परिपूर्ण कर दिया।। वरिष्ठ साहित्यकार माधुरी राऊलकर ने सूनी कोख लघुकथा में किटी पार्टी का बढ़िया दृश्य प्रस्तुत किया। अशोक डोलस ने नारायण मूर्ति - सुधा मूर्ति के साथ भेंट का सुंदर संस्मरण सुनाया। मंदा बागड़ी ने बस्ता दो मुझे महापूर का मार्मिक संस्मरण लघुकथा के रूप में सुनाकर खूब तालियाँ बटोरीं। 


दीपक गुप्ता ने लघुकथा श्रद्धा की पराकाष्ठा में मेहनती नौकर कन्हैया की कथा सुनाकर साधुवाद पाया। नंदिनी सुदामल्ला ने केंचुली छोड़ते हुये नागराज का वर्णन करते हुए कक्ष को रोमांचित कर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार वंदना सहाय ने जलेबियाँ शीर्षक से  32 साल बाद रिटायर्ड हुये इंसान की लघुकथा अभिनयात्मक शैली में  दी। शाॅट फिल्म मेकर शरद कांबले ने किसान की शिदोरी मार्मिक लघुकथा में कर्जपीडित किसान की व्यथा से कक्ष को आंदोलित कर दिया। रमेश मौंदेकर ने स्कूली जीवन के प्यारे संस्मरणों से कक्ष में उपस्थित लघुकथाकारें को प्रफुल्लित कर दिया। वरिष्ठ शायर शादाब अंजुम ने दो पन्क्तियों की नेनो लघुकथा से कक्ष को स्तंभित कर दिया। प्रमुख अतिथि डाॅ राम मुले ने सार्थक वक्तव्य के साथ स्वरचित्त लघुकथा दी। अध्यक्षीय वक्तव्य में डाॅ भोला सरवर ने सभी की लघुकथाओं एवं संस्मरणों की सार्थक समीक्षा प्रस्तुत करते हुये स्वयं की बोधप्रद लघुकथा सुनायी। 

संयोजक संचालक हेमलता मिश्र मानवी ने संचालन के दौरान अपनी स्वरचित लघुकथाओं से कक्ष को बाँधे रखा। कंपोजर सिद्धार्थ रामटेके ने पूरे आयोजन को बढिया कंपोजिंग किया। अंत मे विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन और सभी उपस्थित सुधि जनों का आभार व्यक्त करते हुये आयोजन की संपन्नता की घोषणा की।
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