रूप चुराया मेरा
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तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा।
तेरे सुंदर से सुंदर
मनमोहक चित्र बनाए,
पूजा तुझे उम्र भर तुझ पर
गीत लिखे फिर गाए।
होटों से बंसी धुन छीन मधुर सुर छीना मेरा,
तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा।
कर्क रोग जीने की मोहलत
कम से कम देता है,
दे कर कई कष्ट जिंदगी
घायल कर देता है।
सांसें रोईं धड़कन रोई हृदय रुलाया मेरा,
तू ने मेरी हँसी छीन ली रूप चुराया मेरा।
ये विनम्र विनती है
अपने भक्त को क्षमा करना,
जीवन के आखिरी छोर पर
अपने दर्शन देना।
क्यों इतने दुख लिखे भाग्य में दोष बताना मेरा,
तू ने मेरी हंसी छीन ली रूप चुराया मेरा।
- गीतकार अनिल भारद्वाज
एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर
