एक पल की कीमत
पल पल जीते जीते
कभी कभी
जीवन की लंबी राह में
लोग इक पल के लिए
अचानक गम्भीर हो जाते
मजबूर होकर अपने बारे में सोचते
ठिठक के खड़े हो जाते
उस थमे से इक छोटे से पल में
किसी को जिंदगी समझती है
तो किसी की जिंदगी बिखरती हैं
वैसे देखा जाए तो पल आता है
किसी आकलन के पहले चला जाता हैं
पल कभी बारात के साथ बैंड गाजे साथ आता है
तो कभी पतली गली से चुप चाप निकल लेता है
पल किसी के लिए
अलग अलग से नहीं आता
राजा के लिए खास
और गरीब के लिए आम नहीं आता
ये बात समझने में
हमारे नेताओं को सालों लग गये
ये एक पल में भगवान के भी सामने
वीआयपी बन गये।
एक एक पल की कीमत
अपनी अपनी तरह से
समझ में आती हैं
किसी के साथ एक पल
एक युग के समान
तो किसी और के साथ
वही युग एक पल के समान
बदलते हम ही हैं
हमारी सोच भी बदलती हैं
किसी अपने ने अपने के
एक हां के लिए एक पल
अपने तरफ आस भरी
नजरों से देख कर
बड़े बेमन से राह पकड़ ली थी
उस एक पल की देर ने अपनी
पुरी जिंदगी की रफ्तार को
रोक के रखा हैं
रुकी रुकी सी जिंदगी में
अब एक एक पल भारी पड़ रहा है
समय,वक्त,काल वही रुका रहता हैं
ऐसा हम समझते है
वास्तव में काल एक पल में
आगे निकल जाता है
सारी दौलत सारा रुतबा सारे इख्तियार
एक पल में छोड़ कर जाना पड़ता हैं
उस पल में सब की
कीमत शून्य ही रहती है
फिर वह कोई राजा हो या कोई रंक
सारी दौलत खर्च के एक पल भी
ज्यादा का नहीं खरीद सकता
ये मैं नहीं कह रहा
स्टीव कह के गया है।
कोई अपने खाली हाथ
जनाजे के बाहर
दिखाते हुआ रुखसत हुआ
दुनिया जीत के पर भी
हार का जुलूस निकालते
दुनिया से रोते रोते गया
लेकिन आज भी ऐसे हैं बहुत सारे
ज्यादा कर के अकल के मारे
जिन्हे कोई एहसास नहीं
की हर एक पल मोती हैं
बहुमोल बेशकिमती हैं
वे तो पलों को रेत से ज्यादा
कुछ समझते ही नहीं
पल पल की कीमत
आप के हैसियत से होती है
आप के मसरूफियत से होती है
हमारे जैसे तो तो लाखो है
जिन के सैकड़ों पलों की कीमत शून्य है
कुछ थोड़े से है पूरी दुनिया में जिन के
वे सारे एक एक पल जीते है
और इन के एक एक पल की
कीमत अब्जो मे हैं
- राजेन्द्र चांदोरकर (अनिकेत)
नागपुर, महाराष्ट्र
